Wednesday, March 9, 2011

कुछ क्षणिकाए

हाथो की लकीरों में लिखा एक नाम
आज हम मिटाना चाहते हैं
तुझे तेरी तकदीर को वापस लौटाना चाहते हैं
मिले तुझे मंजिल या नहीं..
हम तो बस तुझे साहिल पर लाना चाहते हैं...


2.
जाओ खंजर एक और ले आओ..
दिल के ज़ख्म अब मरहम से भरते नहीं


जाओ कोई पतझड़ ले आओ..
ज़िन्दगी अब बहारो से बहलती नहीं

3.
सुकून को चलो अब आराम थोडा दिया जाये
ज़िन्दगी से अब दो दो हाथ हो जाये...
4.
चुप रह कर भी कह जाती हैं
बातें कई हमारी ऑंखें
इसलिए हम
आजकल पलके मूंदे रहते हैं...

5.

बहुत तंग हैं दिल की वो गलियां
जिनसे होकर मेरी साँसे गुज़रती हैं
तुम अपने यादो की तस्वीर
कहीं और जाकर लगा दो

1 comment:

  1. सुन्दर , भावपूर्ण रचना , ईमानदार कोशिश ...

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