Monday, April 1, 2013

गुमान और गर्व

सजी संवरी एक्सप्रेस वे
देख खुद को इतराए
कभी देखे अपने divider को
तो कभी बीच में लगे फूलो
के पौधों पे इठलाये
और आस पास लहराते खेतो
को देख देख मुस्काए
अपनी काली सड़क पर
सफ़ेद लकीर से नजर कटवाए
और जब भी आस पास कोई
 नन्ही सी पगडण्डी देख
अभिमान से उस पे गुर्राए
देख तू कितनी टेढ़ी मेढ़ी
और मैं सीधी  सपाट दौड़ती जाऊ
तू सुस्त में सरपट तेज़ी लाकर
मुसाफिरों  झटपट मंजिल तक पहुंचाऊ
पगडण्डी धीरे से मुड के बोली
बहना तुम्हे देख तू ही नहीं मुझे
भी तुझ पे गर्व होता है
पर ये देख के दिल मेरा  तेरे लिए रोता है
मैं आज भी कुचली जाती इन्सान या जानवर के पैरों  से
और तू सरपट दौड़ती पहियों से .....................



Saturday, December 29, 2012

29-12-12..........black saturday

andheri galiyo se na nikalna benakab

har libas me yahan insan baitha hai

.
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dekho ye ham nahi shaitan shaitan ko kahta hai...........



2.
dekho dur hi rahna....


kareeb na ana


dil ke har zakhm par

samjhauto ki keele gadi hain

kahin koi keel ukhad kar

tumhara badan na cheer le...........


3.
dekho
suno
socho
in sab se upar hai
poochho khud se
kya insan bankar mujhe sanso ka karz
yun zilat lekar chukana hoga..........

:(

Sunday, December 16, 2012

तेरी यादो के टूट कर बरसे इतने पत्थर के ज़माना मेरी मोहब्बत को शैतान समझ बैठा है

Tuesday, April 17, 2012

आखरी ख़त

सुजा के बाबूजी शत प्रणाम......
यह घिनोना अपराध करने का ख्याल पहली बार तब मन में आया था
जब तुमने यह कह कर दिलासा मुझे दिलाया था......
सुजा की माँ आज एक रात और फुटपाथ पर सोता हूँ
शायद कोई धन्ना सेठ आ जाये और कम्बल दान कर जाये
बेच वो कम्बल बच्चो के दे जून खाने का इन्तेजाम बस हो जाये
कम्बल तो नहीं लाये तुम अपिव्तु कफ़न में लिपटे तुम जरुर आये....
लोगो के बर्तन धोकर किसी तरह बच्चो को अब तक पाला है
पर टी.बी ने अब मुझे पूरी तरह निचोड़ डाला है
तुम्हारा बेटे की भूख अब दो रोटी में नहीं भरती
और बेटी की जवानी अब फटे कपड़ो से है झांकती
और तुम ही कहा करते थे....
गरीब की बेटी पर सांझी नज़र होती है
वो अहसास भी हुआ ...जब चौराहे पर
कुछ मवालियो ने हमारी बेटी को छेड़ा था
बस गिनी चुनी साँसों से अब में जीने
और बच्चो को और जिलाने का कारोबार नहीं कर सकती
बेटी को मव्वालियो से बचने के लिए एक गोली खिला दी
और बेटे को इसलिए के अनाथ कहीं खुद मव्वाली न बन जाये...
अब ये आखिरी गोली मेरे नाम की....
हो सके तो हम सबको लेने स्वर्ग के द्वार आ जाना...
यहाँ साथ जी न सके...वहां साथ जरुर निभाना......

Monday, March 26, 2012

सावन आये तो तू भी आ जाना

सावन आये तो तू भी आ जाना
मन के आँगन की फुलवाड़ी से
दो फूल तोड़ लाना
सजा देना उसे मेरे बालो में
और दो मीठी बाते बोल लेना

धीरे से फिर दिल की दराज़ खोलना
उनमे कुछ ख्वाब बुने रखते थे हम कभी
उन मखमली ख्वाबो को तू
ज़रा अपनी आँखों से भी छू लेना.....

फिर हलके से रूह में उतर कर
तू मुझे इस दुनिया से दूर कहीं
उस जगह ले चलना
जहाँ से लौट के कोई सदा नहीं आती कभी

हर फागन में यही गुहार तुझसे लगते हैं
प्रेम का पुराना आलाप सुनाते हैं
ये आखिरी बार गुहार करते हैं
हर बार की तरह
नैनों को मेघो समझ न बरसाना .
सावन आये तो तू भी आ ही जाना...

Tuesday, December 27, 2011

meri chhoti kavitaye

1.
कुछ ख्वाब देख कर

हैरान थी ऑंखें उनकी

शायद सपने में
कोई आके उन्हें
आइना दिखा गया..


2.
कुछ गीले सपने

टूटे से बिखरे थे

उसके आंगन में

शायद सूखी आँखों में

कुछ आंसू और बचे थे. ...............

3.
ऐ दिल कहा था

न रोना इतना

ये जमीन गीली न करना

देख..

कितने सपने फिसल के गिरे है यहाँ.

4.
वो देखो दूर खडी मौत
मुझे देख कहकहे लगा रही
और अपनी ठिठोली भरे
अंदाज़ में पूछ रही

इन्सान बनके जन्मे हो....
इन्सान बन कर मर भी पाओगे......?????????????

5.
चुप रह कर भी कह जाती हैं

बातें कई हमारी ऑंखें

इसलिए हम

आजकल पलके मूंदे रहते हैं..

6.
बहुत तंग हैं दिल की वो गलियां

जिनसे होकर मेरी साँसे गुज़रती हैं

तुम अपने यादो की तस्वीर

कहीं और जाकर लगा दो

Friday, October 7, 2011

पहचान

दिल के अरमानो को सीने से बाहर निकालो

शहर कि गलिया तंग हैं...

इन्हें खुली हवा थोड़ी खिला दो


लाख जफ्फा करे दुनिया तो क्या

रंझो ग़म को तुम अपना गुलाम बना दो

मुस्कराने कि सजा हर पल मिलेगी

मगर फिर भी तुम उसे अपना ईमान बना दो

बदल दो मायने खुदाई के अपने वास्ते

बस खुद से एक बार अपनी पहचान बना दो